भारतीय शास्त्रीय संगीत : भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक विमर्श
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | MUSIC |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 7 November 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1088 |
Abstract
भारतीय संगीत को विश्व में सर्वोत्कृष्ट संगीत की श्रेणी में स्थान प्राप्त है। भारत की हजारों साल पुरानी सभ्यता, कला, नृत्य, वास्तुकला और साहित्य इसे एक अद्वितीय स्वरूप प्रदान करते हैं। इसे केवल एक भू-खंड के रूप में ही नहीं, बल्कि एक भावना, संस्कार और संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में देखा जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय संगीत की अंतर्निहित शक्ति और उसके बहुआयामी स्वरूप का विश्लेषण करता है। भारतीय संगीत केवल मनोरंजन का साधन न होकर एक आध्यात्मिक साधना और जीवन दर्शन भी है, जिसने सदियों से भारतीय समाज को एक सूत्र में पिरोया है। इस शोध में इस बात का परीक्षण किया गया है कि किस प्रकार वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक संगीत ने अपनी पारंपरिक शुद्धता को बनाए रखते हुए भी बदलती सामाजिक संरचनाओं के साथ सामंजस्य स्थापित किया है। इस शोध पत्र में भारतीय संगीत के सांस्कृतिक पक्ष को रखा गया है, जिसमें पर्वों, रीति-रिवाजों और लोक-जीवन में इसकी प्रधानता का विवेचन है। शोध यह भी रेखांकित करता है कि शास्त्रीय और लोक संगीत का संगम किस प्रकार भारतीय पहचान को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ करता है। यह शोध वर्तमान तकनीकी युग में संगीत के पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण और इसके सामाजिक उत्तरदायित्वों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है।
Keywords: भारतीय ज्ञान परंपरा , आधुनिक वैश्विक विमर्श, बहुआयामी स्वरूप , प्रकृति और समय का संबंध
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