समसामयिक राजनीति में दबाव समूहो की भूमिका का विश्लेषण
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | POLITICAL SCIENCE |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 7 November 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1084 |
Abstract
समसामयिक राजनीति में दबाव समूह (Pressure Groups) एक ऐसा संगठित वर्ग है जिसका उद्देश्य चुनाव लड़ना या सत्ता हासिल करना नहीं होता, बल्कि सरकार की नीतियों और निर्णयों को अपने विशेष हितों के अनुसार प्रभावित करना होता है। समसामयिक राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका और उनके विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण नीचे दिया गया है: दबाव समूहों की प्रमुख भूमिकाएँ एवं कार्य • नीति निर्माण और संशोधन को प्रभावित करना: ये समूह सरकार को कानून बनाने, उनमें बदलाव करने या उन्हंम वापस लेने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे— भारत में किसान संगठनों (जैसे भारतीय किसान यूनियन) के विरोध प्रदर्शनों के चलते कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा। • विशेषज्ञता और जानकारी प्रदान करना: सरकारें अक्सर तकनीकी, आर्थिक या सामाजिक मुद्दों पर गहराई से जानकारी के लिए इन समूहों पर निर्भर करती हैं। फिक्की (FICCI) और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) जैसे व्यापारिक समूह आर्थिक नीतियों पर सरकार को सुझाव देते हैं। • जनता और सरकार के बीच सेतु: ये आम नागरिकों की समस्याओं और अपेक्षाओं को सरकार तक पहुँचाते हैं और शासन प्रणाली को अधिक उत्तरदायी बनाते हैं। • वंचितों और अल्पसंख्यकों की आवाज़ उठाना: ऐसे समूह हाशिए पर मौजूद वर्गों, मजदूरों, छात्रों या पर्यावरणविदों के हितों की रक्षा के लिए मंच प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए— नर्मदा बचाओ आंदोलन या मजदूर संघ (जैसे AITUC, BMS)। • जमीनी स्तर पर आंदोलनों का नेतृत्व: ऐतिहासिक रूप से, सूचना के अधिकार (RTI) के लिए किसान मजदूर शक्ति संगठन का आंदोलन या 2011 का अन्ना हजारे के नेतृत्व में लोकपाल आंदोलन दबाव समूहों/सामाजिक आंदोलनों की ताकत को दर्शाता है।
Keywords: समसामयिक राजनीति , दबाव समूहों के प्रकार , लोकतंत्र में सकारात्मक योगदान, सत्ता प्राप्ति
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