भारतीय संस्कृति पर हिंदू जीवन दर्शन का प्रभाव
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | SOCIOLOGY |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 4 November 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1073 |
Abstract
भारतीय संस्कृति पर हिंदू जीवन दर्शन (सनातन परंपरा) का गहरा प्रभाव रहा है। यह दर्शन केवल पूजा-पाठ तक सीमित न होकर एक संपूर्ण जीवन शैली, आचार-विचार और विश्वदृष्टि का आधार है। [1, 2] हिंदू जीवन दर्शन के प्रमुख प्रभाव • वसुधैव कुटुम्बकम् और सह-अस्तित्व: संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना भारतीय संस्कृति के मूल में है, जिससे समाज में सहनशीलता, आदर और भाईचारा को बढ़ावा मिलता है। [1, 2] • धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (पुरुषार्थ चतुष्टय): जीवन को संतुलित चलाने के लिए चार पुरुषार्थ तय किए गए हैं, जिसमें भौतिक उन्नति (अर्थ और काम) के साथ नैतिक कर्तव्य (धर्म) और आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) को जोड़ा गया है। • कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' (कर्म किए जाओ) की अवधारणा ने भारतीय समाज में कर्तव्यपरायणता, जिम्मेदारी और न्याय के प्रति आस्था को मजबूत किया है। [1] • त्याग और संयम: भारतीय संस्कृति में उपभोग से अधिक 'त्यागपूर्वक भोग' (तेन त्यक्तेन भुंजीथाः) को श्रेष्ठ माना गया है, जो भौतिकतावादी अंधी दौड़ के बजाय संतुलन सिखाता है। [1] • प्रकृति और जीव के प्रति आदर: नदी, पर्वत, वृक्ष और पशुओं को भी देवत्व या किसी न किसी रूप में सम्मान देने की परंपरा रही है, जिससे प्रकृति संरक्षण की भावना संस्कृति में रची-बसी है। • संस्कार और पर्व-त्योहार: जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कारों और ऋतुओं एवं खगोल विज्ञान पर आधारित पर्वों (जैसे दिवाली, मकर संक्रांति) के जरिए सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव बना रहता है।
Keywords: भारतीय संस्कृति , हिंदू जीवन दर्शन , भारतीय दार्शनिक चिंतन , नव-हिंदू धर्म
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