युवाओं में मादक द्रव्य व्यसन : विकसित भारत मिशन की सबसे बड़ी चुनौती
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | SOCIOLOGY |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 1 November 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1071 |
Abstract
भारत में युवाओं में मादक द्रव्य (ड्रग्स) का बढ़ता व्यसन वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के मार्ग में एक बहुत बड़ी सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बनकर उभरा है। [1, 2] समस्या का दायरा और प्रमुख कारण • बड़ी आबादी और चपेट में युवा: भारत दुनिया के सबसे बड़े युवा राष्ट्रों में से एक है, जिस कारण तस्करों और अवैध नेटवर्क का निशाना युवा वर्ग अधिक बन रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों मंर आने वाले 10 से 24 वर्ष के युवाओं में मादक पदार्थों के सेवन की दर लगभग 32.8% पाई गई है। [1, 2] • मुख्य पदार्थ: युवाओं में तंबाकू (26.4%), शराब (26.1%), भांग (9.5%), अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन लगातार बढ़ रहा है। [1, 2] • सीमावर्ती चुनौतियाँ: 'गोल्डन क्रीसेंट' (अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान) और 'गोल्डन ट्रायंगल' (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के समीप होने के कारण सीमावर्ती राज्यों (जैसे पंजाब) में नशीले पदार्थों की तस्करी और उपलब्धता अधिक है। [1, 2] • मानसिक और सामाजिक कारण: बढ़ता मानसिक तनाव, अवसाद (डप्रेशन), अत्यधिक जिज्ञासा, बेरोजगारी और पारिवारिक संवाद की कमी युवाओं को नशे की तरफ धकेल रहे हैं।
Keywords: भारत , मादक द्रव्य (ड्रग्स) , मानसिक और सामाजिक कारण, विकसित भारत मिशन, नशा मुक्त युवा
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