भारत में जेन-जी आंदोलन और उसका भारतीय राजनीति पर प्रभाव
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | POLITICAL SCIENCE |
| Published In | Volume 1, Issue 1 (September-October 2026) |
| Published On | 19 October 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1050 |
Abstract
भारत में जेन-जी (Gen Z) आंदोलन 2026 में मुख्य रूप से बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर उभरा है। [1, 2, 3] जेन-जी आंदोलन के प्रमुख कारण • रोजगार और बेरोजगारी का संकट: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, देश में स्नातक बेरोजगारी दर काफी अधिक है और युवा वर्ग काम की तलाश में संघर्ष कर रहा है। [1, 2] • परीक्षाओं में अनियमितताएँ: राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल और कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं में धांधली तथा पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों और युवाओं में भारी रोष फैला। [1, 2] • कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का उदय: मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद युवाओं ने व्यंग्यात्मक रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन किया, जिसने सोशल मीडिया और मीम्स के जरिए इस विरोध को संगठित किया। [1] • चुनावी और संस्थागत पारदर्शिता की मांग: सितंबर 2026 में मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए चुनाव आयोग (ECI) में आंतरिक असहमति और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह आंदोलन विपक्षी दलों के साथ जुड़कर और व्यापक हो गया। भारतीय राजनीति पर प्रभाव • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: जुलाई 2026 में, मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की गड़बड़ी और देशव्यापी विरोध के दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। 2014 के बाद मोदी कैबिनेट में यह पहला ऐसा इस्तीफा था। [1, 2] • पारंपरिक राजनीति की चुनौती: यह आंदोलन दिखाता है कि युवा अब केवल पारंपरिक चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे संवाद, सीधी भागीदारी और तत्काल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। [1] • राजनीतिक समीकरणों में बदलाव: इस आंदोलन में मध्यमवर्गीय और हिंदू-राष्ट्रवादी माने जाने वाले युवा भी शामिल हुए हैं, जिससे यह धारणा टूटी है कि युवा वर्ग एकतरफा रूप से किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से जुड़ा हुआ है। [1] • सरकार और सुरक्षा बलों का कड़ा रुख: दिल्ली के केंद्रीय इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती, इंटरनेट बंद करने और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की घटनाओं पर मानवाधिकार एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। [1, 2]
Keywords: जेन-जी आंदोलन , भारतीय राजनीति , मानवाधिकार , सोशल मीडिया सहभागिता
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