कामकाजी महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | SOCIOLOGY |
| Published In | Volume 1, Issue 1 (September-October 2026) |
| Published On | 8 October 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1031 |
Abstract
भारत में कामकाजी महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, हालांकि उनके सामने कई दोहरी चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। आर्थिक स्थिति (Economic Status) • श्रम बल भागीदारी (LFPR): श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अनुसार, भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई है। • ग्रामीण बनाम शहरी क्षेत्र: ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं कृषि, पशुपालन, पोल्ट्री और छोटे कुटीर उद्योगों से जुड़ी हैं। शहरी क्षेत्रों में महिलाएं कॉर्पोरेट, शिक्षा, स्वास्थ्य, छोटे व्यवसायों और सेवा क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। • आर्थिक स्वावलंबन: नौकरी या स्वरोजगार से महिलाओं में आर्थिक स्वतंत्रता आई है। वे अपने परिवार की आय में सीधे तौर पर योगदान दे रही हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। • वेतन असमानता और अनौपचारिक क्षेत्र: आज भी एक बड़ा हिस्सा असंगठित (informal) क्षेत्र में काम करता है, जहां पुरुषों की तुलना में कम वेतन, असुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा (जैसे पेंशन, मातृत्व लाभ) का अभाव देखने को मिलता है। सामाजिक स्थिति (Social Status) • आत्मविश्वास और पहचान: काम करने से महिलाओं को सामाजिक पहचान, सम्मान और व्यक्तिगत आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है। परिवार और समाज में उनके विचारों को अधिक महत्व मिलने लगा है। • दोहरी जिम्मेदारी (Work-Life Balance): कामकाजी महिलाओं पर घर संभालने, बच्चों की परवरिश और बुजुर्गों की देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी होती है, जिससे उन्हें अत्यधिक मानसिक एवं शारीरिक दबाव (Double Burden) का सामना करना पड़ता है। • शिक्षा और स्वास्थ्य: आर्थिक रूप से सक्रिय महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा तक पहुंच का लाभ मिलता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है। सरकारी पहल और सुधार • सरकार द्वारा पालना (Palna) योजना जैसी क्रेच सुविधाओं के माध्यम से कामकाजी माताओं को बच्चों की देखभाल में सहायता दी जा रही है। • महिलाओं के कौशल विकास, मातृत्व अवकाश और सुरक्षित कार्यस्थल के लिए विभिन्न श्रम कानूनों व योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।
Keywords: समाज, पितृसत्तात्मक, महिलाओं, सामाजिक, आर्थिक, रोजगार, श्रमिक कामकाजी महिलाए, महिला सशक्तिकरण, समाज, कार्यस्थल
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