International Journal of Multi-Disciplinary Research and Developmental Studies
E-ISSN: 2469-7811 • Impact Factor - 9.587

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महाभारत में धर्म का महत्व

Author(s)डॉ. बिंदू राजपूत
CountryINDIA
Research Areaसंस्कृत
Published InVolume 1, Issue 1 (September-October 2026)
Published On25 September 2026
Paper IdIJMRDS-1011

Abstract

महाभारत में धर्म का महत्व सबसे केंद्रीय और सर्वोपरि है, क्योंकि यह महाकाव्य संपूर्ण रूप से धर्म, कर्म और न्याय के संघर्ष की गाथा है। [1, 2] महाभारत में धर्म का अर्थ और महत्व • ब्रह्मांडीय व्यवस्था: महाभारत के अनुसार धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, न्याय, संयम और अपने कर्तव्यों का सही निर्वाह है। [1, 2] • धर्मो रक्षति रक्षितः: ग्रंथ का यह संदेश है कि जो व्यक्ति या समाज धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। [1, 2] • यतो धर्मस्ततो जयः: महाभारत का अंतिम और सबसे बड़ा उपदेश है कि जहाँ धर्म होता है, वहीं विजय होती है। अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न लगे, उसका पतन निश्चित है। [1, 2] • संकट और कर्तव्य: पांडव और कौरवों का युद्ध इसी बात का प्रतीक है कि परिवार या मोह से ऊपर उठकर अपने नैतिक कर्तव्य (धर्म) का पालन करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। [1, 2]

Keywords: महाभारत, धर्म, महत्व, अर्थ , केंद्रीय

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