चाणक्य के राजनीतिक विचार आज के संदर्भ में कहां तक उचित
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | POLITICAL SCIENCE |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 5 November 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1081 |
Abstract
आजकल राजनेताओं को उनकी राजनीतिक पार्टियों का चाणक्य कहा जा रहा है। इसके कई कारण हैं, जैसे उनकी नीति-निर्माण क्षमता या सत्ता पर नियंत्रण रखने की उनकी क्षमता। आज चाणक्य को अक्सर गंदी राजनीति का जनक कहा जाता है, लेकिन क्या सच में ऐसा है? अगर हम इतिहास पर नज़र डालें तो ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में हमें एक असहाय पुत्र मिलता है, जिसे अपने जन्मस्थान से भागकर मीलों दूर एक अज्ञात क्षेत्र में जाना पड़ा। इसी पुत्र ने बाद में अपने शिष्य को प्रशिक्षित किया, जो भारत भर में फैले साम्राज्य का पहला राजा बना। चाणक्य के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है, लेकिन उन्हें भारत का सबसे महान राजनेता माना जाता है। चाणक्य की धूर्तता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण राजा पोरस का किस्सा है। चाणक्य ने धनानंद को हराने के लिए राजा पोरस की सहायता ली और बदले में धनानंद के राज्य का आधा हिस्सा ले लिया। विजय के बाद, चाणक्य ने राजा के लिए सुख-सुविधाओं का प्रबंध करने के बहाने विष कन्याओं को पोरस के कक्ष में भेजा। इन कन्याओं ने पोरस की हत्या कर दी, जिससे चंद्रगुप्त के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ। चाणक्य ने राक्षस मंत्री को चंद्रगुप्त के पक्ष में करने के लिए भी कई तरह की तरकीबें अपनाईं। मौर्य साम्राज्य की सफलता के पीछे वही मुख्य रणनीतिकार थे। सत्ता पर प्रभुत्व स्थापित करने के बाद, चाणक्य ने शांति काल में प्रशासन के लिए कठोर नैतिक संहिताएँ निर्धारित कीं, साथ ही अर्थशास्त्र में कमजोर और शोषितों की सामाजिक सुरक्षा के लिए एक विस्तृत संरचना भी प्रस्तुत की। हालाँकि चाणक्य नीति में कई ऐसे अंश हैं जो स्त्री-द्वेषी प्रकृति के हैं, फिर भी यह समाज के पालन के लिए एक उच्च नैतिक संहिता प्रदान करती है।
Keywords: चाणक्य , इतिहास, राजनीतिक विचार , सत्ता पर प्रभुत्व
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