अवध के किसानों की समस्याएँ एवं उनका आंदोलन
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | HINDI |
| Published In | Volume 1, Issue 2 (November-December 2026) |
| Published On | 31 October 2026 |
| Paper Id | IJMRDS-1065 |
Abstract
अवध के किसानों का आंदोलन (1920-1922) ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और बड़े जमींदारों (तालुकेदारों) के अत्यधिक शोषण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किसान संघर्ष था। [1, 2] किसानों की मुख्य समस्याएँ • अत्यधिक लगान और कर: तालुकेदारों और जमींदारों द्वारा किसानों से बहुत अधिक भू-राजस्व और लगान वसूला जाता था। [1] • बेगार प्रथा: किसानों को बिना किसी पारिश्रमिक या मजदूरी के जमींदारों के खेतों पर जबरन काम (बेगार) करना पड़ता था। [1] • जबरन बेदखली और पट्टे की अनिश्चितता: किसानों को भूमि पर कोई स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं था और उन्हें मनमाने ढंग से जमीन से बेदखल कर दिया जाता था। [1] • अवैध कर (नज़राना): लगान के अलावा किसानों से विभिन्न प्रकार के गैर-कानूनी कर और 'नज़राना' वसूले जाते थे। [1] • प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: युद्ध के बाद महंगाई और करों में हुई भारी वृद्धि से किसानों की स्थिति दयनीय हो गई थी। [1]
Keywords: किसान आंदोलन, अवध , गौरवशाली, किसान सभा
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