बिजौलिया किसान आंदोलन में शामिल क्रांतिकारियों का योगदान
| Author(s) | |
|---|---|
| Country | INDIA |
| Research Area | HISTORY |
| Published In | Volume 1, Issue 1 (September-October 2026) |
| Published On | 2 October 2026 |
| Pages | 1-9 |
| Paper Id | IJMRDS-1025 |
Abstract
बिजौलिया किसान आंदोलन (1897 से 1941 तक) भारत का सबसे लंबा और अहिंसक किसान आंदोलन था, जिसमें विभिन्न क्रांतिकारियों और नेताओं ने अहम योगदान दिया: [1, 2, 3, 4] प्रमुख क्रांतिकारी एवं नेता और उनका योगदान • विजय सिंह पथिक (भूप सिंह गुर्जर): o इन्हें इस आंदोलन का जनक और मुख्य संचालक माना जाता है। o इन्होंने 1917 में 'ऊपरमाल पंच बोर्ड' की स्थापना की। o 'प्रताप', 'राजस्थान केसरी' जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। [1, 2, 3, 4] • साधु सीताराम दास: o इस आंदोलन के प्रथम चरण (1897-1914) के प्रमुख प्रेरक और मार्गदर्शक थे। o इन्होंने ही सबसे पहले किसानों को एकजुट किया और स्थानीय स्तर पर आवाज उठाई। [1, 2] • माणिक्य लाल वर्मा: o आंदोलन के अंतिम चरण में नेतृत्व संभाला। o इन्होंने अपना प्रसिद्ध गीत 'पंछीड़ा' गाकर किसानों में नया जोश और ऊर्जा भरी। [1] • नानजी पटेल और ठाकरी पटेल: o ये दोनों किसान नेता मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह के पास बिजौलिया के किसानों की पीड़ा और 84 प्रकार के करों की शिकायत लेकर गए थे। [1] • हरिभाऊ उपाध्याय: o गांधीजी के अनुयायी और प्रसिद्ध पत्रकार, जिन्होंने बाद के वर्षों में आंदोलन को वैचारिक और राजनीतिक मजबूती दी। [1, 2] • जमनालाल बजाज: o गांधीजी के निर्देश पर आंदोलन से जुड़े और इसके अंतिम दौर में इसका कुशल संचालन किया। [1, 2] • अन्य स्थानीय नेता: o इसमें फतेह करण चारण, प्रेमचंद भील और ब्रह्मदेव जैसे स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाए रखा।
Keywords: बिजौलिया किसान आंदोलन , गांधीजी के अनुयायी, स्वतंत्रता संग्राम , क्रांतिकारी
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