International Journal of Multi-Disciplinary Research and Developmental Studies
E-ISSN: 2469-7811 • Impact Factor - 9.587

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डॉ. भीमराव अंबेडकर के राजनीतिक विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता

Author(s)प्रोफेसर मुरारी लाल दायमा
CountryINDIA
Research AreaMUSIC
Published InVolume 1, Issue 1 (September-October 2026)
Published On2 October 2026
Paper IdIJMRDS-1023

Abstract

डॉ. भीमराव अंबेडकर के राजनीतिक विचार वर्तमान समय में भी भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनकी प्रासंगिकता के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं: [1, 2] 1. सामाजिक लोकतंत्र और समता • अंबेडकर का मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र तब तक अधूरा है, जब तक उसे सामाजिक लोकतंत्र का आधार न मिले—जिसका अर्थ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (भाईचारा) है। [1, 2] • वर्तमान समय में जातिगत भेदभाव, सामाजिक विषमता और असमानता को दूर करने के लिए उनके विचार मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। [1, 2] 2. संवैधानिक नैतिकता और विधि का शासन • उन्होंने संविधान को केवल कानूनों का दस्तावेज नहीं, बल्कि "नैतिकता का दस्तावेज" माना था। [1] • वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक नैतिकता के क्षरण के दौर में, अंबेडकर की 'संवैधानिक नैतिकता' का सिद्धांत यह याद दिलाता है कि व्यक्तिगत या धार्मिक निष्ठा से ऊपर संविधान और कानून होना चाहिए। [1, 2] 3. महिला सशक्तिकरण • अंबेडकर का यह विचार कि "किसी समुदाय की प्रगति उस स्तर से मापी जाती है जिस स्तर पर उस समुदाय की महिलाएं आगे बढ़ी हैं," आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। [1] • महिलाओं को समान अधिकार, शिक्षा और सम्मान देना आधुनिक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी जरूरत है। [1] 4. राजनीति में 'व्यक्ति पूजा' (भक्ति) का विरोध • उन्होंने चेतावनी दी थी कि राजनीति में 'व्यक्ति पूजा' या 'नायक पूजा' (Hero-worship) तानाशाही और पतन का निश्चित रास्ता है। अपनी स्वतंत्रता को किसी महान व्यक्ति के चरणों में समर्पित न करने की उनकी चेतावनी आज के राजनीतिक माहौल में बहुत महत्वपूर्ण है। [1] 5. एकपक्षीय तानाशाही और बहुमत के अंधविरोध का विरोध • अंबेडकर वंशवादी शासन और केवल एक पार्टी के वर्चस्व वाले तंत्र के खिलाफ थे। उनका मानना था कि वास्तविक लोकतंत्र तभी सुरक्षित है जब सत्ता को बदलने की और उसकी आलोचना करने की स्वतंत्र क्षमता बनी रहे। [1] 6. वंचितों का प्रतिनिधित्व और आरक्षण • समाज के शोषित, वंचित और पिछड़े वर्गों (SC/ST/OBC) को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्होंने जिस प्रतिनिधित्व और सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) की वकालत की, वह आज भी सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का आधार है। [1, 2]

Keywords: डॉ. भीमराव अंबेडकर , राजनीतिक विचारों, वर्तमान प्रासंगिकता

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