International Journal of Multi-Disciplinary Research and Developmental Studies
E-ISSN: 2469-7811 • Impact Factor - 9.587

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Online Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 1 Issue 1 September-October 2026 Submit your research for publication

भारतीय नवजागरण और हिंदी पत्रकारिता

Author(s)DR. VANDANA SHARMA
CountryINDIA
Research AreaHINDI LITERATURE
Published InVolume 1, Issue 1 (September-October 2026)
Published On28 September 2026
Paper IdIJMRDS-1018

Abstract

भारतीय नवजागरण और हिंदी पत्रकारिता का गहरा संबंध है। 19वीं सदी में हिंदी पत्रकारिता ने समाज में तार्किकता, राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता की भावना और सामाजिक सुधारों का सूत्रपात किया। [1, 2] हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत और नवजागरण • उदन्त मार्तण्ड (1826): पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को कलकत्ता से पहला हिंदी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' निकाला। इसी दिन को भारत में 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। [1, 2] • राजा राममोहन राय और संवाद कौमुदी: राजा राममोहन राय ने सामाजिक कुरीतियों (जैसे सती प्रथा) के खिलाफ जनमत तैयार करने के लिए पत्रकारिता का सहारा लिया। उन्होंने 'संवाद कौमुदी' (1821) और हिंदी का 'बंगदूत' (1829) जैसे पत्र निकाले। [1] भारतेंदु युग और जन-जागरण • भारतेंदु हरिश्चंद्र की भूमिका: भारतेंदु युग को हिंदी नवजागरण का स्वर्णकाल माना जाता है। [1, 2] • प्रमुख पत्रिकाएं: भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 'कवि वचन सुधा', 'हरिश्चंद्र चंद्रिका' और 'बाला बोधिनी' जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया। [1] • मुख्य मुद्दे: इन पत्रिकाओं ने स्वदेशी, भाषा-प्रेम, गरीबी, विदेशी शोषण, अंधविश्वास और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध देशवासियों को जागरूक किया। [1] द्विवेदी युग और परिपक्वता • महावीर प्रसाद द्विवेदी: 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी भाषा के व्याकरण, शैली और वैचारिक परिपक्वता को संभाला। • सांस्कृतिक चेतना: इस दौर में पत्रकारिता केवल साहित्य तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की आवाज बन गई। [1] नवजागरणकालीन हिंदी पत्रकारिता की मुख्य विशेषताएं • राष्ट्रीयता और स्वाधीनता: अंग्रेजी औपनिवेशिक नीतियों का खुलकर विरोध और स्वराज की भावना का प्रसार। [1, 2] • सामाजिक सुधार: छुआछूत, अंधविश्वास, पाखंड और रूढ़िवादिता पर तीखा प्रहार। [1] • भाषा का निर्माण: हिंदी को जनमानस की भाषा बनाना और खड़ीबोली का विकास करना।

Keywords: हिंदी पत्रकारिता , भारतीय नवजागरण , राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता , स्वाधीनता

Download Full Paper (PDF)